Tuesday, April 24, 2012

आपातकाल के दौरान मनमोहन की ये कविता बहुत  प्रसिद्ध रही और आज उतनी ही कारगर है. 

राजा का बाजा बजा

ता थेई, ता था गा,
रोटी खाना खाना गा
राजा का बाजा बजा तू
राजा का बाजा बजा
आ राजा का बाजा बजा !

सच मत कह, चुप रह
स्वामी सच मत कह, चुप रह
चुप रह, सह, सह, सह, सह
राजा का बाजा बजा
आ राजा का बाजा बजा !

राशन...न...न...न...न...न
ईंधन...न...न...न...न...न
बरतन-ठन-ठन-ठन-ठन-ठन
खाली बरतन-ठन-ठन-ठन
जन गन मन अधिनायक
उन्नायक पतवार, उन्नायक पतवार
उन्नायक....
तन मन वेतन सब अपने सब अर्पण कर तू
स्वामी सब अर्पण कर तू
झट-पट कर श्रम से ना डर
श्रम से ना डर तू
आ राजा का बाजा बजा
ता थेई ताथा गा, रोटी खाना खाना गा !
राजा का बाजा बजा तू
राजा का बाजा बजा ! 

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